नारी, नहीं रौनक हो तुम

नारी, नहीं रौनक हो तुम
घर की प्राण हो, जान हो तुम
भीतर खुशियों की खनखनाहट
बाहर अभिमान हो तुम।
माँ-बहन-पत्नी, बेटी
रिश्तों का मधुर गान हो तुम
कुछ भी कहे कविता मगर
जिंदगी की शान हो तुम।

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Responses

  1. वाह सर, वास्तव में नारी घर का उजाला है, नारी पर सुन्दर कविता लिखी है।

  2. नारी के आदर्शों को प्रतिष्ठित करती हुई संवेदनशील तथा तथ्यपरक रचना

  3. कवि सतीश जी ने नारी के बारे में बहुत ही ख़ूबसूरत पंक्तियां लिखी हैं
    पूरी की पूरी कविता इतनी शानदार है कि समझ ही नहीं आ रहा है कि कौन सी पंक्तियां हाई लाइट करूं ,शानदार और मजबूत लेखनी की बेहद शानदार रचना ।
    काबिले तारीफ प्रस्तुति..

    1. इस सुंदर समीक्षागत टिप्पणी हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद है गीता जी, इस उत्साहवर्धन हेतु आभार।

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