ना समझ संतान

कहानी-ना समझ संतान
पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के दो पुत्र प्रवेश तथा आवेश, दोनों पुत्रों की शादी हो गई थी, प्रवेश के पास चार संतान राजेश, राकेश, सुधा, पूनम, तथा पत्नी का नाम सीमा था, छोटे पुत्र की पत्नी का नाम गरिमा था और बच्चों का नाम आकाश और प्रकाश था,
किसान के दोनों पुत्र अशिक्षित ,दुष्ट ,अहंकारी व नशेड़ी थें,
किसान के दोनों बच्चों के बच्चों की परवरिश व शिक्षा से संबंधित देखरेख किसान के हाथ में था, किसान का सपना था धन इकट्ठा करके अपने इन छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है , किसान का यह सपना धरा का धरा रह गया ,वृद्धा अवस्था में जाने के कारण किसान खेती तथा अन्य काम करने में असमर्थ होने लगा ,किसान के पुत्र घर का पैसा शराब जुआ गलत संगति में खर्च करना शुरू किए, कुछ दिन बाद पैसा खत्म होना शुरू हुआ ,प्रवेश की हालत शराब के कारण बिगड़ गयी, इसी बीच किसान की मृत्यु हो जाती है, दोनों पुत्र पूर्ण रूप से मनमानी हो गयें खेती गिरवी तथा सारे पशु बिक गए ,इसी बीच प्रवेश की हालत शराब के कारण बहुत बिगड़ गई, हॉस्पिटल में भर्ती हुआ, महंगे इलाज के कारण कृषि यंत्र तथा बचीं खेती भी गिरवी हो गयी, प्रवेश का परिवार पूर्ण रूप से गरीब बेबस लाचार मजदूर परिवार बन गया, घर के लोग दाने दाने के लिए मोहताज हो गए, छोटे भाई की पत्नी गरिमा ने परिवार में अलगाव की शुरुआत किया ,वह अपना परिवार लेकर मायके चली गई ,अब राजेश पढ़ने की उम्र में मजदूरी करने लगा, मां और बेटी भी मजदूरी करने लगीं ,समय अपने गति पर बढ़ता रहा, पिता तथा परिवार की हालत में थोड़ा सुधार हुआ ,कुछ समय बाद डॉक्टर ने प्रवेश को पूर्ण रूप से स्वस्थ बताकर अस्पताल से छुट्टी दे दिया, राजेश के सहयोग मां सीमा ने मनिहारन का काम शुरू किया, गांव-गांव ,घर-घर जाकर सामान बेचना शुरू की, बहन सुधा ने ब्यूटी पार्लर तथा सिलाई कढ़ाई बुनाई का कोर्स करना शुरू की ,राजेश बहुत पहले ही मजदूरी का काम छोड़ करके मोटर मैकेनिक का काम सीख लिया था ,इसी बीच ईश्वर ने खुशियों से खिलते हुए परिवार में एक हादसे को प्रकट किया ,राजेश की सबसे छोटी बहन पूनम एक्सीडेंट में खत्म हो जाती है, एक बार पुनः इस परिवार में शोक की लहर दौड़ आती है, परिवार इस सदमे से निकल कर पुनः अपने उसी मार्ग पर बढ़ता रहा ,अब पिता प्रवेश भी घर के सामने चाय पान की छोटी दुकान चलाना शुरु किया, देखते देखते पुनः पूरा परिवार विकास की ओर बढ़ने लगा ,छोटे पुत्र राकेश का दाखिला अंग्रेजी स्कूल में हुआ ,(जो किसान सपना था) सुधा कोर्स खत्म करने के बाद घर पर ही दुकान डाल कर अच्छा पैसा कमाना शुरू की, अब सभी के सहयोग से बड़ा भाई राजेश भी अपनी खुद की दुकान डाल कर अपना व्यवसाय छोटे स्तर पर शुरू किया, देखते देखते पूरा परिवार फिर से सुख शांति तथा विकास की ओर बढ़ चला, पैतृक संपत्ति जो गिरवी थी खेती तथा अन्य उसे छुड़ाया गया,प्रवेश की पत्नी को सरकारी आवास मिलता है और पैसा घर से लगा करके एक सुंदर सा घर बनवाते हैं, और सरकारी बैंक से लोन लेकर ट्रेक्टर तथा इत्यादि खेती के लिए मशीन खरीद लिये,प्रवेश अपनी पुरानी गलती को याद करके अपने भाई को समझाने, उसके ससुराल गया तथा वापस लाकर दोनों मिलकर पुनः खेती तथा खुद का व्यवसाय करना शुरू किए,
सारांश-आज प्रवेश का परिवार पूर्ण रूप से स्वस्थ ,स्वच्छ ,सुंदर ,सामाजिक-आर्थिक शैक्षिक रूप से विकास की ओर अग्रसर व खुशहाल है.
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नाम- ऋषि कुमार प्रभाकर
पता- खजुरी खुर्द कोरांव
प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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