निज को परख

हद में रह
ज्यादा न बोल
फट जाए कहीं
जैसे कोई ढोल

बड़ा या छोटा
समझ तो रख
तूं है क्या
निज को परख

पिता हैं तेरे
आंखें न‌ दिखा
पुत्र तैयार खड़ा
तेरा लौटाने को

नीचे ही‌ बहती
तट तालाब सभी
पेय ऊपर फेंकी
शक्ल नीचे अभी

आदर देकर ही
सबका हो पायेगा
स्वयं में खोकर
सब कुछ गंवाएंगा

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. आदर देकर ही
    सबका हो पायेगा
    ______बड़ों का आदर सम्मान करना चाहिए,यही सुंदर संदेश देती हुई बहुत सुन्दर रचना।

New Report

Close