निराशाओं का भंवर

हौसला रखकर चलना होगा
परिस्थिति हमेशा इसतरह
कहाँ रह पाएगी ।
कबतक दर्द से नाता रहेगा
कहाँ तक निराशाओं का
यह भंवर सहमाएगी।
कठिनाई के ये दिन
जाते-जाते भी
सकारात्मकता की
सीख हमें दे जाएँगी ।
ये तकलीफ़े
जो वक्त से मिले हैं हमें
एक नयी सोंच से
परिचय मेरा करवायेगी ।
धीरज के ये तिनके
समेट कर रखें हैं हमने
आने वाले अच्छे दिनों की
जो नन्ही- सी आश जगायेगी ।


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6 Comments

  1. Pragya Shukla - December 26, 2020, 10:29 pm

    बढ़िया प्रस्तुति की है आपने
    सुमन जी हमेशा की तरह

    • Suman Kumari - December 26, 2020, 10:38 pm

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञाजी!

      • Pragya Shukla - December 27, 2020, 6:01 pm

        उच्चस्तरीय लेखन चुंनिंदा शब्द

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 27, 2020, 8:27 am

    बहुत खूब

  3. Sandeep Kala - December 27, 2020, 9:55 am

    बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  4. Geeta kumari - December 27, 2020, 6:08 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

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