निराशा दूर करो (कुंडलिया छन्द)

अगर निराशा है कहीं, दूर करो तत्काल,
मन में अपने जोश को, सदा रखो संभाल।
सदा रखो संभाल, जोश में जोश न खोना,
आप हमेशा आग नहीं शीतलता बोना।
कहे लेखनी नहीं, निराशा में रहना तुम,
हिम्मत रखना दूर रहेंगी सारी उलझन।
——- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय
प्रस्तुति- कुंडलिया छन्द


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4 Comments

  1. Chandra Pandey - January 16, 2021, 12:43 pm

    Wow, very nice

  2. Geeta kumari - January 16, 2021, 2:00 pm

    निराशा के भाव से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर छंद बद्व कविता

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 16, 2021, 7:43 pm

    अतिसुंदर भाव

  4. Piyush Joshi - January 16, 2021, 7:50 pm

    वाह वाह

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