नुमाइंदे

बिहार की विडंबना
गरीबी की वज़ह से
जहाँ की जनता
सङको पर निकल पङी
वहाँ के 153 करोङ,
नुमाइंदे धनाढ्य अथाह धन
53 करोङ की मिल्कियत
के मालिक हैं ।
ये धनाढ्य क्या समझेंगे
दर्द उन गरीब भूखों के
उत्पीडित, बाढ़ से पीङित
नक्सली हिंसा की जद में जीते
भूखे-नंगे, प्यासा, बिलबिलाते
जन- गण की।

Related Articles

गरीबी

गरीबी एक एहसास है, इसमें एक मीठी सी दर्द है, रोज़ की दर्द में भी संतोष छिपी है, फकीरी में अमीरी का एहसास है, शायद…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

Responses

New Report

Close