नज़्म

नज़्म थी तेरी बरसात वाली
अब तोह इंतेज़ार में उसी नज़्म का सहारा है

फासले बन गए उन नज़दीकियों में
अब तोह याद में उसी का ही सहारा है

साद में तेरे मै बरबाद हो गया
बरसात के इन दिनों में बस कभी आँखें नम हो जाती है


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Hi Everyone, I am from Kolkata.Land of culture and heritage.These are my creations.Please post your comment if you like it

10 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - September 26, 2019, 11:50 am

    ,👌👌

  2. Ashmita Sinha - September 26, 2019, 6:17 pm

    Nice

Leave a Reply