पता

जलाकर रख दिए ख़त मगर यादों को अग्नि दगा दे गई,
मुट्ठी में दबाकर रखी थी मगर खुशबू को हवा उड़ा ले गई,

बेबाक यूँही नशे में गुज़र रही थी लडखड़ाती हुई ज़िन्दगी,
आई एक रात फिरजो ख्वाबों में मुझे तुम्हारा पता दे गई।।

राही अंजाना

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

9 Comments

  1. Poonam singh - October 2, 2019, 11:30 am

    Nice

  2. Sahendra Singh - October 2, 2019, 3:54 pm

    वाह लाजवाब जी

  3. nitu kandera - October 4, 2019, 10:20 am

    Nice

Leave a Reply