पत्नी देवो भव:

राजा दशरथ ने माना कहना,
अपनी पत्नी कैकेई का
एक वचन की खातिर देखो,
बहु-बेटे वन में जाते हैं,
प्राण त्यागने पड़े भले ही,
आज दशरथ जी पूजे जाते हैं।
श्री राम ने माना,
कहना सीता जी का
स्वर्ण-मृग के पीछे दौड़े,
चाहे उस घटना के कारण
राम-सिया दोनों ही बिछुड़े
हम उनके गीत बिछोह
के गाते हैं..
श्री राम पूजे जाते हैं ।
मंदोदरी की कही ना मानी,
रावण था कितना अभिमानी
मारा गया राम के हाथों,
सम्मान नहीं वो पाता है
और,आज तक जलाया जाता है ।
तो बगैर अपना दिमाग लगाए
करो वही जो पत्नी चाहे,
ये सूत्र बड़ा उपयोगी
जीवन सुखमय और यशस्वी बनाए ।
“जन-हित में जारी
आगे मर्ज़ी तुम्हारी”

*****✍️गीता


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11 Comments

  1. Rajeev Ranjan - October 21, 2020, 5:49 pm

    अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना कोई आपसे सीखे।
    बहुत खूब मजेदार

  2. Geeta kumari - October 21, 2020, 7:39 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद राजीव जी 🙏 अभी महा काव्य रामायण के साक्ष्य दे दिए है ,फिर भी आप मुझे मियां मिट्ठू कह रहे है?

  3. Satish Pandey - October 21, 2020, 9:48 pm

    कवि गीता जी की हास्यपुट लिए यथार्थ रचना, उदाहरण भी वास्तविक हैं, सच्ची बात सच्ची कविता

    • Geeta kumari - October 21, 2020, 10:38 pm

      सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी
      बहुत बहुत आभार सर🙏

  4. Harish Joshi U.K - October 21, 2020, 11:02 pm

    बेहतरीन

  5. Suman Kumari - October 21, 2020, 11:12 pm

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

  6. Pragya Shukla - October 21, 2020, 11:43 pm

    Good

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 22, 2020, 3:23 pm

    वाह बहुत खूब
    रामायण के हरेक घटना और हरेक पात्र एक एक अनोखे। शिक्षक हैं

  8. Geeta kumari - October 22, 2020, 3:56 pm

    सादर धन्यवाद भाई जी बहुत आभार 🙏

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