पथिक

मीलों का पथ, पथरीला भी
पथिक हूं मैं भी, चल दूंगा।
सारे मौसम शुष्क रहे क्यों
बादल हूं मैं, बदल दूंगा।

भीष्म बनो तुम, कर्ण बनो तुम
पार्थ हूं मैं भी, ध्यान रहे।
मार्ग मेरा अवरुद्ध करोगे
उत्तर तुम्हें प्रबल दूंगा।

तुम शशक दोड़े और फिर
बस चार कदम में हांफ लिए।
मैं कच्छप अपनी दृढ़ता का
परिचय तुमको कल दूंगा।

साथ मेरे तुम यदि चलोगे
साथ चलेंगे मीलों तक।
कुछ प्रश्नों के उत्तर पूछुंगा
कुछ प्रश्नों के हल दूंगा।

राह मेरी है, सफर मेरा है
इसका निर्णय मैं लूंगा,
कि किसको मैं हलाहल दूंगा
किसको गंगाजल दूंगा।

मेरे साथ अनुज भी हैं कुछ
तुमको भी चलना है चलो।
एक मां का आंचल दूंगा
एक पिता का बल दूंगा।

गंतव्यों तक राह कठिन है
मैं एकाग्र चलुं अविरत।
तुम इतना कोहराम करोगे
मैं भी कोलाहल दूंगा।

या मंज़िल तक जाऊंगा मैं
या मिट्टी हो जाऊंगा।
या वृक्ष मैं बन नए पथिकों को
अपने अनुभव के फल दूंगा।

नरेन्द्र सिंह राजपुरोहित

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