पराई धरा

देख-देख कर,
आज के युवा-वर्ग को
सोचता है मन मेरा,
क्या कमी है देश में मेरे
जा बैठे दूर इतनी,
एक पराई धरा
कभी तो याद आती होगी,
स्वदेश की
कभी तो मन मचलता होगा,
निज देश आने को
फ़िर क्या है,
जो रोकता उन्हें
ना समझ पाया,
बावरा मन मेरा..

*****✍️गीता


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11 Comments

  1. Anu Singla - November 22, 2020, 8:11 am

    Well said

  2. Pragya Shukla - November 22, 2020, 5:28 pm

    सही कहा
    जब योग्य युवा अपनी कला का प्रदर्शन
    दूसरे देशों में करेगा तो
    उस देश की तरक्की होगी
    इसलिए अपने देश में
    ही रहकर अपना हुनर
    दिखाकर रोटी कमानी
    चाहिए

    • Geeta kumari - November 22, 2020, 8:40 pm

      कविता की सुंदर और सटीक समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  3. Satish Pandey - November 22, 2020, 9:29 pm

    लाजवाब पंक्तियाँ, उम्दा कवित्त्व क्षमता

  4. Satish Pandey - November 22, 2020, 9:32 pm

    लाजवाब पंक्तियाँ, उम्दा कवित्व क्षमता

    • Geeta kumari - November 22, 2020, 10:23 pm

      सुन्दर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी।आभार

  5. Rishi Kumar - November 23, 2020, 11:31 am

    अति सुंदर रचना

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 25, 2020, 7:59 am

    अतिसुंदर भाव

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