परिंदा

ऊड़ न सकूँ, पंख कतरा मैं परिंदा हूँ।
पर मरा नहीं अभी तक, मैं जिंदा हूँ।
आजादी तुझे ही नहीं हमें भी है पसंद,
तू ना सही, तेरे कृत्य पर मैं शर्मिन्दा हूँ।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

12 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 4:31 pm

    वाह जी वाह

  2. Antariksha Saha - September 9, 2019, 5:58 pm

    बहुत अच्छे भाई

  3. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 7:06 pm

    Nice

  4. Ashmita Sinha - September 9, 2019, 11:02 pm

    Nice

  5. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 7:57 am

    Sunder rachna

Leave a Reply