परिंदा

ऊड़ न सकूँ, पंख कतरा मैं परिंदा हूँ।
पर मरा नहीं अभी तक, मैं जिंदा हूँ।
आजादी तुझे ही नहीं हमें भी है पसंद,
तू ना सही, तेरे कृत्य पर मैं शर्मिन्दा हूँ।

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12 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 4:31 pm

    वाह जी वाह

  2. Antariksha Saha - September 9, 2019, 5:58 pm

    बहुत अच्छे भाई

  3. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 7:06 pm

    Nice

  4. ashmita - September 9, 2019, 11:02 pm

    Nice

  5. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 7:57 am

    Sunder rachna

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