परिस्थितियों का क्या है ?

परिस्थितियों का क्या है ?
आज खुब हँसाया है तो कल रूलायेगा भी ।
आज हँसके जो दिन गुजारे है, व कल रोके भी गुजारना है ।
मगर योगी हरपल हँसके गुजारते जिन्दगी है ।
लेकिन भोगी रो-रो के दिन काटते है ।।1।।

योगी-भोगी दोनों ही होता माया के अधीन है ।
ईश्वर प्रताप योगी मायापति को जानता है ।
लेकिन भोगी भौतिक सुखों में ईश्वर को खोता है ।
दोनों ही ईश्वर सम्मुख पुत्र समान है ।
लेकिन ईश्वर दरश कोई विरला योगी ही पाता है ।।2।।

परिस्थियों का क्या है ?
बिषम परिस्थियों में भी योगी कर्मयोगी कहलाता है ।
लेकिन सम परिस्थिति में भी भोगी अवसर को गँवाता है ।
दोनों के पास एक ही समय होता है ।
लेकिन दोनों के मंजिल अलग-अलग होता है ।।3।।
कवि विकास कुमार

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