पाबंदी

सच बोलने पर, आज पाबंदी लग चुकी है।
मर चुके ज़मीर, यहाँ खुलेआम बिक रहे हैं।

डर के कारण, कोई आवाज़ नहीं उठाता
यूँ तारीफों वाले बोल तो, बहुत लोग बोल रहे है।

आज जो हालत हैं, ये किसी से छुपे नहीं
खुलकर कुछ कह नहीं सकते,
बस इसीलिए संभलकर लिख रहे है।


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9 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 8, 2019, 7:26 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  2. देवेश साखरे 'देव' - September 8, 2019, 8:33 pm

    बहुत खूब

  3. राम नरेशपुरवाला - September 9, 2019, 9:15 am

    बढ़िया

  4. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 9:09 am

    सही बात

  5. Sukhbir Singh Alagh - September 10, 2019, 9:53 am

    Thanks ji

  6. nitu kandera - October 20, 2019, 6:24 am

    Wah

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