पारिजात के फूल

पारिजात के फूल झरे,
तन-मन पाए आराम वहां।
स्वर्ग से सीधे आए धरा पर,
ऐसी मोहक सुगंधि और कहां।
छोटी सी नारंगी डंडी,
पंच पंखुड़ी श्वेत रंग की।
सूर्य-किरण के प्रथम स्पर्श से,
आलिंगन करते वसुधा का।
वसुधा पर आ जाती बहार,
इतने सुन्दर हैं हरसिंगार।
रात की रानी भी इनका नाम,
ये औषधीय गुणों की खान।
श्री हरि व लक्ष्मी पूजन में होते अर्पण,
इनकी सुगन्ध सौभाग्य का दर्पण।
कितनी कोमल कितनी सुंदर,
इन फूलों की कान्ति है।
इन के सानिध्य में आकर बैठो,
महसूस करो कितनी शान्ति है।
____✍️गीता


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6 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 22, 2021, 7:29 pm

    अतिसुंदर रचना

  2. Pragya Shukla - February 23, 2021, 2:33 pm

    Very nice

  3. Rajeev Ranjan - February 24, 2021, 6:15 am

    कौन न प्रकृति सौंदर्य में खो जाते
    शायद कोई ऐसा हो जिसे आपकी लेखनी न भाये

    • Geeta kumari - February 24, 2021, 11:26 am

      समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद राजीव जी 🙏

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