पावन मास मास

पूस गया ठण्ढी गई
छाया नव उल्लास।
कर सेवन त्रिवेणी तू
आया पावन मास।।
आया पावन मास
माघ अतिसुखकारी।
स्नान ध्यान पूजन
कथा करे अपहारी।।
कथा करे अघहारी
विनयचंद नाम जपा कर।
पा मानव तन निर्मल
तिल गुड़ कुछ दान कर।।
कम्बल स्वेटर और रजाई
दीनन को दान करो रे भाई।
सेवा करो सदा दुखियों की
सदा सहाय रहे रघुराई।।


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5 Comments

  1. Geeta kumari - February 2, 2021, 3:24 pm

    माघ मास पर अति सुन्दर कविता , बहुत ख़ूब

    • Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 2, 2021, 5:09 pm

      शुक्रिया बहिन
      सर्वश्रेष्ठ सदस्य बनने की बधाई

      • Geeta kumari - February 2, 2021, 5:39 pm

        बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. Satish Pandey - February 2, 2021, 5:49 pm

    उत्तम प्रस्तुति

    • Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 2, 2021, 6:22 pm

      धन्यवाद पाण्डेयजी
      सर्वश्रेष्ठ कवि के सम्मान को पुनः हासिल करने पर बहुत बहुत बधाई

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