पिंजरबद्ध

पिंजरबद्ध ना लिख सकूंगी
अंकुश होगा सिर पर तो फिर,
भावों को कैसे व्यक्त कर करूंगी
मेरे कवि मन को यदि, उन्मुक्त माहौल मिलेंगे
तभी इस कवि मन में, गीतों के पुष्प खिलेंगे
कहीं भली है बस सुंदर सराहना,
इस अंधी दौड़ की टैंशन से..।

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Responses

  1. कहीं भली है बस सुंदर सराहना,
    इस अंधी दौड़ की टैंशन से..।
    बहुत ही सुंदर और बेहतरीन पंक्तियाँ, उच्च विचारों से सुसज्जित आपकी लेखनी को सैल्यूट।

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