प्यार में भीगते-भिगाते रहो

आज जितना भी बरसता है
बरस जाने दो,
फिर तो सावन भी चला जायेगा,
सींच कर कोना-कोना धरती का
फिर तो सावन भी चला जायेगा।
आज जितना भी चाहो भीगो तुम
प्यार ही प्यार भरा मौसम है,
प्यार में भीगते-भिगाते रहो,
फिर तो सावन भी चला जायेगा।


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10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 9, 2020, 10:57 am

    N ic e

  2. Satish Tiwari - August 9, 2020, 12:45 pm

    बहुत ही बढ़िया

  3. Ambuj Singh - August 9, 2020, 1:47 pm

    Acha

  4. Indu Pandey - August 9, 2020, 10:04 pm

    bahut khoob

  5. Kumar Piyush - August 12, 2020, 10:44 pm

    बहुत खूब

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