प्यार

हम उनसे प्यार और वो बेक़रार करते रहे
कहना था कुछ और, और ही कुछ कहते रहे
वो दौर-ए-जवानी मुझे सारा मेहखना दे रही थी
लेकिन हम तो बस अपनी आँखों से ही पीते रहे

निगाहों से कभी पीला कर तो देखो
जुल्फों की रातो में किसी को सुला कर तो देखो
ज़हर, नशा और काँटे, गुलाब लगने लगेंगे
कभी मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो

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12 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 12:22 am

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. देवेश साखरे 'देव' - September 11, 2019, 12:26 am

    बहुत खूब

  3. राम नरेशपुरवाला - September 11, 2019, 7:04 am

    सुन्दर

  4. ashmita - September 11, 2019, 3:52 pm

    Nice

  5. Poonam singh - September 11, 2019, 4:38 pm

    Nice

  6. राही अंजाना - September 11, 2019, 5:27 pm

    वाह

  7. Ravi Bohra - September 12, 2019, 9:31 pm

    Dhanyawad sirji…..🙏

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