प्रतिक्षा का पुल

मेरा इंतज़ार एक पुल है
असमर्थताओं के उस उफनते दरिया पर
जो बह रहा है हम दोनों की दुनियाओं के बीच..!

जिससे गुज़रकर एक दिन
मेरी आँखों मे पलते मखमली सपनें
उतरेंगे वास्तविकता के धरातल पर..!!

प्रिय! मेरी प्रतीक्षा का पुल
निर्मित है उम्मीदों की मिट्टी से
जो आधार बनेगा हमारे सुखद मिलन का..!!

©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’
(30/05/2021)

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. किसी की प्रतीक्षा में ह्रदय में उठ रहे प्रतिपल भावों को बहुत ही संजीदगी से कविता में ढाला गया है

New Report

Close