प्रपंच

जो बढ़ रहा है हाथ नापाक उसे तोड़ना होगा,
हाथ मिलाया था जो बेशक उसे छोड़ना होगा,

रच लिए बखूबी प्रपंच और चढ़ लिए ढेरों मंच,
अब उतर कर जंग में इनका सर फोड़ना होगा,

वार्तामाप नहीं अब और कोई भी आलाप नहीं,
ये मानलो इन हवाओं का भी रुख मोड़ना होगा।।

राही अंजाना

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12 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - November 10, 2019, 8:01 pm

    Khub kha

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 10, 2019, 9:58 pm

    बहुत खूब

  3. nitu kandera - November 11, 2019, 8:16 am

    Wah

  4. देवेश साखरे 'देव' - November 11, 2019, 11:40 am

    वाह

  5. Neha - November 18, 2019, 8:21 pm

    Wash

  6. Abhishek kumar - November 24, 2019, 9:10 am

    वाह

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