प्रभात का संदेशा

बह रही पवन ,खिल रहे सुमन,
कितना अदभुद यह नजारा है,
छंट गया तिमिर, बीती यामिनी,
रवि की किरणों ने पैर पसारा है।
नभ में चिड़ियाँ,कलरव करतीं,
गुंजन यह मधुरिम छाया है,
आलस्य त्याग हे मनुज जाग
पूरब से संदेशा आया है,
धरती का आंचल महक रहा,
नूतन यह सवेरा आया है,
करें धन्यवाद उस ईश्वर का,
जिसने संसार रचाया है,
जिसने संसार रचाया है।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्गा भाभी-01

उम्मीद की लौ जल-जल के बुझ रही थी नाउम्मीदी के तिमिर में, हर साँस जल रही थी परालम्बन भरे जीवन से मुक्ति हमें दिलाने वीर-…

Responses

  1. करे धन्यवाद उस ईश्वर का जिसने संसार रचाया है ।बहुत ही सुंदर पंक्तियां अमिता जी

  2. बह रही पवन ,खिल रहे सुमन,
    कितना अदभुद यह नजारा है,
    छंट गया तिमिर, बीती यामिनी,
    रवि की किरणों ने पैर पसारा है।
    —— प्रातःकाल की सुंदरता का अद्भुत चित्रण

  3. आलस्य त्याग हे मनुज जाग
    पूरब से संदेशा आया है,
    धरती का आंचल महक रहा,
    नूतन यह सवेरा आया है,
    _____ प्रातः काल के सौंदर्य का बहुत ही सुंदर शब्द चित्र प्रस्तुत किया है आपने एकता जी। बहुत ख़ूब

New Report

Close