प्रभु ऑनलाइन हैं..

कोई भी कर्म करो,
इतना रखो ध्यान
स्वर्ग -लोक में भी,
जा पहुंचा है ,इंटरनेट श्रीमान
प्रभु के पास भी अब हैं,..
टैब , लैपटॉप , मोबाइल,
अब रहते हैं प्रभु भी,
हमेशा ही ऑनलाइन..

*****✍️गीता*****


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14 Comments

  1. MS Lohaghat - October 2, 2020, 1:47 pm

    बहुत खूब, बहुत ही बढ़िया

  2. Satish Pandey - October 2, 2020, 2:21 pm

    अब रहते हैं प्रभु भी,
    हमेशा ही ऑनलाइन..
    बहुत खूब, बहुत सुंदर।
    आधुनिकता का पुट देकर लोगों द्वारा किये जा रहे कर्मों पर ईश्वर की सतत दृष्टि होने को प्रतिपादित किया है। सुन्दर शब्दों में शानदार अभिव्यक्ति

  3. Geeta kumari - October 2, 2020, 2:45 pm

    सुन्दर और सटीक समीक्षा देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी । बहुत बहुत आभार 🙏

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 2, 2020, 7:44 pm

    बहुत खूब

    • Geeta kumari - October 2, 2020, 8:16 pm

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  5. Ramesh Joshi - October 2, 2020, 9:04 pm

    बहुत खूब, अति उत्तम

  6. Isha Pandey - October 2, 2020, 9:23 pm

    Very nice poem

  7. Chetna jankalyan Avam sanskritik utthan samiti - October 2, 2020, 9:30 pm

    बहुत ही सुंदर

    • Geeta kumari - October 2, 2020, 9:47 pm

      समिती को बहुत बहुत धन्यवाद एवम् आभार 🙏

  8. Rajiv Mahali - October 2, 2020, 9:58 pm

    बहुत खूब

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