प्रवासी मजदूर

प्रवासी मजदूर

मजदूर हूं, मजबूर हूं,
कैसी है तड़प हमारी,
या हम जाने, या रब जाने,
आया कैसा चीनी कोरोना,
ले गया सुख-चैन हमारा,
जेब में फूटी कौड़ी नहीं,
छूट गया काम- धाम हमारा,
खाने को पड़ गए लाले,
घर जाना अब है जरूरी हमारा,
जाऊँ या न जाऊँ दोनों तरफ है मौत खड़ी,
मंजिल है मिलोंं दूर फिर भी,
घर जाना है जरूरी हमारा,
कुछ पैदल ही चले गए,
कुछ साइकिल से चले गए,
कुछ रास्ते में ही दुनिया छोड़ गए,
सामने है कोरोना खड़ी,
जाऊं या न जाऊं,
दोनों तरफ है मौत खड़ी,
मंजिल है मिलों दूर फिर भी,
घर जाना है जरूरी हमारा,
महीनों से हूं पिंजरबद्ध पंछी बना,
लॉकडाउन में मैं हूं पड़ा,
ऐसे में आया राहत सरकार का,
प्रवासी मजदूर के लिए चलेगी रेलगाड़ी,
मन खिल गया हमारा,
बुढ़ी माँ मुझे बुला रही,
अब घर जाना है जरूरी हमारा ।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

11 Comments

  1. Praduman Amit - June 6, 2020, 7:12 pm

    वाह।

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 6, 2020, 9:32 pm

    Nice

  3. Master sahab - June 7, 2020, 10:04 am

    कृपया वर्तनी जांच कर प्रतियोगिता में भाग ले

  4. Pragya Shukla - June 19, 2020, 9:34 am

    👌

  5. Abhishek kumar - July 12, 2020, 11:57 pm

    👏👏

  6. Satish Pandey - July 21, 2020, 7:20 pm

    bilkul sahi Likha hai

  7. Kumar Piyush - July 21, 2020, 10:09 pm

    bahut khoob

Leave a Reply