प्रेम का पहला खत

नाराज न होना खत को पढ़कर, न जानू मैं खत को लिखना।
बस आपके खातिर लिख डाला, यूॅ न हँस देना खत को पढ़कर।
कुछ शब्द चुनिंदा लिये हुए, कुछ खुशबु फूलो की लेकर यह कलम तुम्हारी तारीफों के गुण लिखती है हल्के-हल्के।
मैं सावन वाला गीत लिखूॅ या बरसात का कोई राग लिखूॅ इस कलम प्रज्जवलित ताकत से मैं प्रेम प्रदर्शी राग लिखूं। नाराज न होना खत को पढ़कर, न जानू मैं खत को लिखना।
बस आपके खातिर लिख डाला, यूॅ न हँस देना खत को पढ़कर।
मन मैं उमंग और तरंग लिये लिखता हूॅ खत मैं तुम्हे प्रिये, जो पढ़ते-पढ़ते इस खत को मेरी सूरत इसमें आ जाये, तो अपनी कोमल पलकों से
मुझको आँखों मैं भर लेना
मुझको आँखों मैं भर लेना

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