प्रेम का बीज

बोया था एक रोज
बड़े नाजोअंदाज से
प्रेम का बीज’
आज उसमें फल पके हैं
मायूसी और बेबसी के
बहुत लदा है वो वृक्ष
माँ अक्सर कहा करती थी
तुम्हारा बोया बीज
एक पुष्ट पौधा बनकर
बहुत फलता-फूलता है
सही कहा करती थीं माँ..!!

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Responses

  1. संवेदनशील तथा मार्मिक कविता
    भावुक कर देने वाली रचना है यह आपकी..
    थोड़ी कड़वी है परंतु सत्य बै

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