पड़ चुकी है साँझ

पड़ चुकी है साँझ
घर घर में चमकते बल्ब ऐसे
लग रहे हैं, जैसे तारों ने किया
धरती में डेरा।
और चंदा आसमां में
आ चुका है, फुल चमक में,
चाँद-तारे और बल्बों का मिलन
फैला चमन में।
साथ देने आ गयी शीतल हवा
भी साथ में,
अद्भुत नजारा सज गया है,
इस अंधेरी रात में।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

Responses

  1. पर्वतों का बहुत सुंदर नज़ारा प्रस्तुत किया है ।”चांद तारों और बल्बों का मिलन फैला चमन में, साथ देने आ गई शीतल हवा भी साथ में ” यमक अलंकार का सुंदर प्रयोग । ऐसा ही दृश्य देखने को मिलता है पर्वतीय इलाकों में। सौंदर्य से परिपूर्ण अद्भुत वर्णन ।
    लेखनी की विलक्षण प्रतिभा को अभिवादन ।

    1. सादर प्रणाम है आपको जो इतनी खूबसूरत समीक्षा की है आपने। यह आपकी विद्वता को परिलक्षित करती है। सादर धन्यवाद गीता जी

New Report

Close