*फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा*

दही बड़े खट्टी-मीठी चटनी संग,
मैंने बहुत बनाए l
लाल, गुलाबी केसरिया पीले,
रंग भी बहुत लगाए l
मीठी गुजिया, चटपटे दही बड़े,
सब ने मिलजुल कर खाए l
आप की होली कैसी रही,
हमको भी बतलाओ..
फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा,
कैसे मनी बताओ॥
_______✍गीता

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

फ़िर बतलाओ जश्न मनाऊँ मैं कैसी आजादी का

आतंकी की महिमा मंडित मंदिर और शिवाले खंडित पशु प्रेमी की होड़ है फ़िर भी बोटी चाट रहे हैं पंडित भ्रष्टों को मिलती है गोदी…

Responses

  1. मीठी गुजिया, चटपटे दही बड़े,
    सब ने मिलजुल कर खाए l
    —— बहुत उत्तम और सरस प्रस्तुति

New Report

Close