फूल तुम्हारा शुक्रिया

मेरे गतिशील पैरों को
आखिर तुमने रोक लिया
फूल तुम्हारा शुक्रिया
नतमस्तक हूँ
तुम्हारे निश्छल स्वभाव के सामने
थकी उबी आँखो के तारा हो तुम
हिरण की तरह उछलने वाले मन को
ठहरे हुए जल की तरह स्थिर कर दिया
जान कर खुशी हुई कि तुम जलते
नहीं हो
तुम्हारी अहंकार शून्यता तुम्हें सर्वाधिक सुंदर बनाती है
तुमने इंसानियत को जिंदा किया
तुम्हारे स्पर्श से
भगवान् भाते हैं
प्रदूषण के जमाने में सुगंध दिया
फूल तुम्हारा शुक्रिया

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

Responses

  1. बहुत ही सुंदर शब्दों के माध्यम से आपने फूल की महिमा को व्यक्त किया है सचमुच बहुत ही सुंदर कविता है जितनी तारीफ की जाए कम है..

New Report

Close