फैसला किसके हक में ???

सब सो जाते हैं पर मुझे नींद नहीं आती
जितना उसको पाना चाहूँ
उतना ही दूर चली जाती..!

पलकें बंद करती हूँ स्वागत में उसके
मन भी शांत रखती हूँ
सुनती हूँ सदाबहार नगमें उसके लिए
पर नहीं आती फिर भी नींद..

अब उसकी शिकायत करने जा रही हूँ
देखती हूँ कब सुनवाई होती है
और फैसला किसके हक में आता है!!


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3 Comments

  1. Geeta kumari - October 22, 2020, 12:31 pm

    Very beautiful poem and nice presentation

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 22, 2020, 3:08 pm

    अति, अतिसुंदर

  3. Satish Pandey - October 22, 2020, 9:51 pm

    वाह, लाजवाब

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