बगिया अधूरी है

जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है
बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है
बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी
हाँ जिन्दगी अधूरी है ।।
बेटी की थाली में,ना राखी हो ना रोली हो
तो बेटे के हाथों की कलाई भी अधूरी है ।।
बेटी ना हो तो बेटे की जयगान कैसे हो
बगैर कर्णावती के, हुमायूँ की पहचान अधूरी है ।।
गर लङाई हो ना झगड़ा हो,घर गुलज़ार कैसे हो
बगैर भाई के बहना की, हर ख्वाइश अधूरी है ।।
शान्ता न होती तो, रघुनन्दन कहाँ होते
बगैर सुभद्रा के, कान्हा की गान अधूरी है ।।
बहन से ही दीवाली में, दीपो की थाली है
बगैर उसके गुलालों की, हर रंगोली अधूरी है ।।
भाई न होता तो,उठाये कौन अरमानो की डोली
बगैर भाई के कंधों के, हर शहनाई अधूरी है ।।
कुल का लाल बेटा है, तो बेटी घर की लाली है
बगैर इन दोनों फूलों के, हर बगिया अधूरी है ।।
सुमन आर्या


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7 Comments

  1. Geeta kumari - July 31, 2020, 5:42 pm

    वाह ,सुमन जी बहुत सुंदर कविता है

  2. Suman Kumari - July 31, 2020, 7:38 pm

    धन्यवाद गीताजी

  3. Abhishek kumar - July 31, 2020, 8:10 pm

    सत्य कहा आपने

  4. Abhishek kumar - July 31, 2020, 8:25 pm

    बेटा और बेटा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं अगर एक ना हो तो दूसरा असंभव सा प्रतीत होता है एक दोनों के पूरक है भाई बहन

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 31, 2020, 9:43 pm

    सुंदर भाव

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