बचपन और बुढ़ापा

जीवन तरु की नई कोंपल है बचपन, कोंपल से बनी शाखा युवापन |
शाखाओं से झुका वृक्ष बूढ़ापन, यही चक्र है बचपन, युवा और बूढ़ापन |
खेल खिलौनों में गुजरा प्यारा बचपन, यादें जीवन की सँजोए हुये है बूढ़ापन |
जीवन का यात्रावृतांत बूढ़ापन, सपनों का संसार है बचपन |

बचपन सुबह और बुढ़ापा शाम सा है, एक उमंग की रसवेरी, और दूजा चूसा आम सा है |
बचपन एक फूल की बगिया, बुढ़ापा एक नदी का दरिया |
बसंत की मधुर बहार बचपन, पौष की कंपाती ठंड बूढ़ापन |
तन दुर्बल, मन आहत्, निर्झर काया, यादों की गीता सी बूढ़ापन का साया |

बचपन करता बचकाना हरकत, बूढ़ापन लाता जीवन से नफरत |
जीवन रुपी चक्की में हंसता बचपन, इसके पाटों में पिसता बूढ़ापन |
खुशियों का सागर बचपन, यादों, पश्चातापों का भँवर बूढ़ापन |


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1 Comment

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2020, 11:22 pm

    सुंदर

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