बड़ी अजीब है ये घुँघरू

बड़ी अजीब है ये घुँघरू।
बन्धे जब दुल्हन के पैरों में
बड़े खुशनसीब है ये घुँघरू।।
झनकती जब ये कोठों पर
बड़े हीं गरीब हैं ये घुँघरू ।
बांध के किन्नर भी नाचे
पर बदनसीब है घुँघरू।।
पीतल के हो या हो चांदी के
कला के नींब है ये घुँघरू।
विनयचंद साहित्य सरगम के
सदा करीब है ये घुँघरू।।


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7 Comments

  1. Geeta kumari - December 9, 2020, 10:02 pm

    घुंघरू के बारे में बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Satish Pandey - December 9, 2020, 10:31 pm

    बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति है, शास्त्री जी

  3. Piyush Joshi - December 9, 2020, 10:57 pm

    वाह, श्रेष्ठ रचना

  4. Pragya Shukla - December 11, 2020, 10:58 pm

    क्या बात है बहुत खूब

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