बदलते रहे वही

बदलते रहे वही नज़रें बार-बार
हमने तो बस अपना चश्मा बदला

राजेश’अरमान”


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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. Rohan - April 23, 2016, 10:00 pm

    nice

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