बम्बई मिठाई वाला

टन- टन टन- टन करते वो
फेरीवाला आता था।
गदा के जैसे डब्बा अपने
काँधे पर ले आता था।।
सिर पे टोपी गले में गमछा
नाक पे ऐनक बड भाता था।
बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय
बूढ़ा ललाय गाते गाते आता था।।
खड़ा हो गया घर के आगे
हम बच्चों की टोली आई।
आजा बाबू पास हमारे
लेकर आया बम्बई मिठाई।।
दस पैसे में माला ले लो
घड़ी मिलेगी चार आने में।
मात्र अठन्नी काफी है एक
मोटरसाइकिल बन जाने में।।
पूरा रुपया लेकर आओ
तुम्हें दिखाएँ हवाई जहाज।
खाया खेला मौज मनाया
क्या था बचपन क्या है आज।।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

1 Comment

  1. Satish Pandey - January 27, 2021, 2:14 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

Leave a Reply