बरखा

बरखा जरा प्यार बरसा दे
कब से प्यासा अंतर है

तू प्यास बुझा दे
बरखा जरा प्यार बरसा दे

बरस बरस बरखा मेरी
कितने तुमको बरस गए

सिंधु की एक बूँद को
हम कबसे तरस रहे

तू सिंधु से बिंदु मिला दे
बरखा जरा प्यार बरसा दे

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

बिंदु

कर चुके भौतिक उपलब्धि , फिर भी मन उदास है बिंदु को सिंधु मिलन की, जनम जनम से प्यास है –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–

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