बर्दाश्त नहीं होता

तुम्हारे जाने का दर्द क्यों ना हो ए ख़ुशी,

हमसे तो दुखो के जाने का दर्द भी –

बर्दाश्त नहीं होता .

तुम्हारी चुप्पी सहन कैसे हो ए दोस्त,

हमसे तो दुश्मनों का चुप रहना भी-

बर्दाश्त नहीं होता .

तुम्हे जलन थी हमसे,

तुम्हारे जलने का दर्द क्यों ना हो ए महजबीं,

हमसे तो रात के चिराग का जलना भी –

बर्दाश्त नहीं होता .

 

 

 

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने…

Responses

New Report

Close