बस! अलविदा न कह सके ।

कुछ कहा नहीं,
पर रूके भी कहाँ !
कहना था अलविदा ,
पर समय कहाँ !
इस वक्त की रहमत
कि हम न कह सके ,
न उनसे मिल सके ,
बस ! अलविदा न सके ।।

वो पास था ,
वो कोई करीबी था ,
बस ! नज़रें झुकाए
मेरे सामने खडा था ।
फिर भी,
क्यों नहीं कहा था ,
उनसे अलविदा ?

यादें ही उसकी
अब साथ हैं,
कोई साथी ही नहीं ,
कि दिखा दु अपनी नज़रों से
तस्वीर उसकी ।
रहना था साथ उसके ,
पर सफर वो अधूरा रह गया !
बस ! अलविदा ना कहा गया ।।

कोई बात नहीं दोस्त ,
मैं फिर संभालू खुद को ,
लबों पे मुस्कान रखूँ,
यही बात याद दिलाऊ खुद को ,
बस ! अलविदा ना कहना चाहूँ कभी तुझको ।।

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3 Comments

  1. ashmita - July 20, 2019, 12:46 pm

    Nice

  2. Sukhmangal - July 30, 2019, 6:30 am

    बहुत खूब

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