बस मेरा अधिकार हो

देह में अभिमान की गर्मी पड़ी
आसुंओं के स्रोत सूखे पड़ गये
नैन की झिलमिल सुहानी पुतलियां
आग के ओले गिराती रह गई।
बाजुओं की शक्ति से कमजोर की
कुछ मदद करने की चाहत खो गई
हर खुशी पर बस मेरा अधिकार हो
लूट लेने की सी आदत हो गई।

— डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत उत्तराखंड


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13 Comments

  1. Suraj Tiwari - July 11, 2020, 8:35 am

    एक लाइन में क्या आपकी तारीफ़ लिखू
    पानी भी जो देखे आपको तो प्यासा हो जाये..।
    बहुत सुन्दर 💐💐💐💐💐💐💐

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 11, 2020, 10:20 am

    Nice

  3. Satish Pandey - July 11, 2020, 10:31 am

    धन्यवाद जी

  4. Abhishek kumar - July 11, 2020, 10:50 am

    सुन्दर

  5. Raju Pandey - July 11, 2020, 11:00 am

    बेहतरीन 👌👌

  6. Indra Pandey - July 11, 2020, 12:58 pm

    Waah

  7. Anita Sharma - July 11, 2020, 10:15 pm

    Waah sir bahut badiya

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