बहुत दूर तलक जाकर भी कहीं दूर जा पाते नहीं

बहुत दूर तलक जाकर भी कहीं दूर जा पाते नहीं,

परिंदे यादों के तेरी मेरे ज़हन से उड़ पाते नहीं,

बनाकर जब से बैठे हैं मेरी रूह पर घरौंदा अपना,

किसी जिस्म पर चैन से ये ठहर पाते नहीं।।

राही (अंजाना)

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

हम परिंदे हैं…

हम बसाएंगे अपना घरौंदा कहीं… हम परिंदे हैं एक जगह रुकते नहीं… जहाँ मिलती हैं खुशियाँ जाते हैं वहाँ हम गमों में घरौंदा बनाते नहीं……

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close