बाती

मत डाला करो अब और तेल!
यह बाती तो कब की जल कर मिट चुकी है,
उस ज्योत के क्षणभर के उजाले के लिए |

-Bhargav Patel (अनवरत)

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

खालीपन

शब्द छलकते रहते है अनवरत आँखों से | और मैं उन्हें श्याही बना कर भरता रहता हूँ कोरे कागजो का खालीपन | -Bhargav Patel (अनवरत)

मेरे अस्तित्व

मेरे अस्तित्व के इर्दगिर्द बैठे है कई जाल मकड़ी के भेदना असंभव मगर प्रयास अनवरत मेरे सत्य के इर्दगिर्द बैठे है असत्य के पंछी उड़ाना…

Responses

New Report

Close