बात बतानी है

बात बतानी है

कुछ बात बतानी है कुछ बात छुपानी है,
लोगों को हर रोज नई कहानी सुनानी है,

बा मुश्किल ही सही करनी मनमानी है,
न दो कहनी किसीकी न चार लगानी है,

चुप नहीं रहना कुछ पल की जवानी है,
यूँहीं गुज़रने न दो ये तुम्हें ही बनानी है,

एहसासों के पन्नों में न पहचान दबानी है,
राही आग नहीं कलम पानी पे चलानी है।।

राही अंजाना

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

14 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 11, 2019, 11:48 am

    खूब

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 11, 2019, 11:55 am

    वाह

  3. nitu kandera - November 11, 2019, 4:33 pm

    good

  4. NIMISHA SINGHAL - November 11, 2019, 8:51 pm

    Nice

  5. Ashmita Sinha - November 12, 2019, 1:07 am

    Nice

  6. Neha - November 18, 2019, 8:20 pm

    Wah bhai

  7. Abhishek kumar - November 24, 2019, 9:08 am

    बहुत खूब

Leave a Reply