बाल कविता – स्कूल बैग

बाल कविता – स्कूल बैग
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मेरा प्यारा स्कूल बैग
सुन्दर सा है स्कूल बैग,
चलती हूँ तो पीठ में रहता
न्यारा सा है स्कूल बैग।
सभी किताबें और कापियां
रहती प्रेम भाव से इसमें,
पेंसिल कलम लंच बॉक्स से
भरा भरा सा स्कूल बैग।
वाटर बोतल, फल के दाने
कभी टाफियां, कभी चॉकलेट,
नई नई चीजों से सज्जित
मेरा प्यारा स्कूल बैग।
मेरा प्यारा स्कूल बैग
सुन्दर सा है स्कूल बैग,
चलती हूँ तो पीठ में रहता
न्यारा सा है स्कूल बैग।
डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय
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10 Comments

  1. MS Lohaghat - October 18, 2020, 7:26 pm

    बहुत खूब , बहुत बढ़िया

  2. Piyush Joshi - October 18, 2020, 7:29 pm

    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति है सर वाह

  3. Devi Kamla - October 18, 2020, 7:30 pm

    लाजवाब लेखन पाण्डेय जी

  4. Vasundra singh - October 18, 2020, 8:04 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:12 pm

    अतिसुंदर

  6. Geeta kumari - October 18, 2020, 8:20 pm

    कवि सतीश जी द्वारा लिखी गई बहुत सुंदर बाल रचना है।
    बच्चों के स्कूल बैग और खाने पीने की चीजों का यथार्थ चित्रण

  7. Chetna jankalyan Avam sanskritik utthan samiti - October 18, 2020, 8:26 pm

    वाह वाह, कमाल लेखन

  8. Ramesh Joshi - October 18, 2020, 8:33 pm

    बाल कविता लाजवाब है।

  9. Chandra Pandey - October 19, 2020, 7:47 am

    Wow, nice poem

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