बाल कविता

मेरा बेटा
———–
गोलू मोलू गप्पा सा,
गुस्सा जैसे हलवा सा, अकड़ -मकड़ दिखलाता है ,
हंसाओ तो सब भूल जाता है।
लड़ने को हरदम तैयार ,
बहन को करता बहुत प्यार
लेकिन अकड़ दिखाता है,
रोब खूब जमाता है।
प्यार से सब कुछ देता है गुस्से में सब लेता है।
हंसता रहता हरदम ऐसे फूल हंसा हो खिलके जैसे ।ख बातें करता बड़ी-बड़ी परीक्षा लेता घड़ी-घड़ी ,
अच्छा मम्मी जरा बताओ क्या है मतलब यह समझाओ ।
सुना-सुना कर गपोड़ी बातें,
हसाता हरदम दिन हो या रातें।
ऐसा मेरा बेटा है कहो जरा यह कैसा है दोस्त बनाने में है न्यारा,
मम्मी पापा का का है दुलारा।
निमिषा सिंघल

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

+

New Report

Close