बीते कल

हम उनमें थे — वो मुझमें थे, उफ़ !!!! , वो क्या दिन थे।
जब हम रुठ जाते थे, तब वो चाँद सितारे तोड़ लाते थे।।

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. बहुत खूब।
    मैं भी कहूं अमित जी ये चांद तारें आज आसमान में क्यों नही दिख रहे है😊 जरूर किसी आशीक ने तोड़ लिए होंगे।😊

    बस थोड़ा सा मजाक सर

  2. बहुत ही सुंदर , एक दूसरे से प्रेम की पराकाष्ठा में जो होता है उसका सरल शब्दों में सुन्दर वर्णन किया है आपने

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