बुद्धू सा मन

बुद्धू सा मन चंचल सा यह तन
बहका बहका सा लगे
सांसो का भी चलन।
१.
दर्पण बनी तेरी आंखें मेरे सनम
सरगोशियां तेरी सीने में दे जलन।
बतियां तेरी मुझे बहका ना दे सनम,
बुद्धु सा मन…..
२.
सांसों में मेरी तेरे ही सुर बसे
धड़कन बनी घड़ी भागे समयसे परे।
शर्मो हया मेरे गालों पर फिर सजे
बुद्धु सा मन…

निमिषा सिंघल


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8 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - October 11, 2019, 11:01 am

    बहुत सुन्दर

  2. Poonam singh - October 11, 2019, 6:30 pm

    Bahut khub

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 11, 2019, 8:18 pm

    वाह बहुत सुंदर

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