बुरा नहीं है जग में कोई

जय श्री राम ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है,
सबका अपना-अपना पाठ है,
सबको वही निभाना है ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है ।।1।।
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तीन गुण होता नरों में
मायापति की माया सबको नचाती है,
मन ही राम को मारती है,
मन ही राम को जीताती है ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है ।।2।।
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मन भटका, माया मारी
तब जाके मायापति की याद आई
राम नाम है, जग में हर दुःख की दवा
जो कोई लेता इसे, वही जीतता मन की व्यथा ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है ।।3।।
कवि विकास कुमार


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3 Comments

  1. Suman Kumari - January 30, 2021, 12:30 am

    सुंदर

  2. Geeta kumari - January 30, 2021, 10:16 am

    उत्तम अभिव्यक्ति

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 30, 2021, 9:02 pm

    सुंदर

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