बेअसर

है कौन जो तुम्हारी यहां फिकर कर रहा है,
हर लम्हा जो एक तुम्हारा जिकर कर रहा है,

हर एक कश के साथ जो जला रही है जिगर,
वो सिगरट तुम्हारे सफर को बेअसर कर रहा है।।
राही अंजाना

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

12 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 5, 2019, 3:56 pm

    वाह बहुत सुंदर

  2. NIMISHA SINGHAL - November 5, 2019, 10:29 pm

    Nice

  3. Poonam singh - November 6, 2019, 3:40 pm

    Nice

  4. nitu kandera - November 8, 2019, 9:16 am

    Wah

  5. Neha - November 10, 2019, 2:32 pm

    Waah

Leave a Reply