बेटी

कहीं भ्रूण हत्या बेटी की,
कहीं पर हुआ बलात्कार है
कहीं एसिड अटैक सुना
और कहीं दहेज़ की, सही मार है
गर यूं ही चलता रहा तो,
भारत में भगवान भी
बेटी ना देंगे
पैदा होने से ही डर गई बेटियां,
तो कहां से वंश बधाओगे
बेटी ही ना होगी तो ,
बहू कहां से लाओगे
संसार को कैसे रच पाओगे ।।

सही (सहन करी)..

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Responses

  1. कवि गीता जी की आगाह करती खूबसूरत पंक्तियाँ ।
    यथार्थ लिखा है, जिस तरह गर्भ से लेकर आगे तक बेटी के साथ अत्याचार हो रहा है, वह सोचनीय है। बेटी है तो जीवन है। बहुत सुन्दर भाव। साथ ही सरल सुबोध अलंकारिक भाषा का प्रयोग है। “भारत में भगवान भी” जैसी सुन्दर पंक्तियाँ अनुप्रास अलंकरण से विभूषित हैं।

    1. समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर ।🙏कविता के मर्म तक पहुंचने के लिए आपका हार्दिक आभार ।

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