बेरुखी

बेरुखी से बड़ी सजा ही नहीं ,
खता क्या थी, पता ही नहीं
वो इस कदर दूर हो गए ,
कभी पास भी थे क्या,
अब तो ऐसा लगता ही नहीं ।।

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Responses

  1. वाह, बहुत ही खूबसूरती से मानवीय मनोभावों का चित्रण किया है। श्रृंगार के वियोग पक्ष की झलक है। सुन्दर भावाभव्यक्ति

  2. बहुत ही खूबसूरती से हृदय के भाव स्पष्ट किए गए है । विरह वेदना का सटीक वर्णन ।

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